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मूर्ख मित्र से बुद्धिमान दुश्मन अच्छा।

   


   
क राजा को बंदर पालने का बहुत शौक था । उसके महलों में कई प्रकार के बंदर थे । जब भी कोई नई नस्ल का बंदर आता तो राजा उसे देखकर बहुत खुश होता । 

    इन बंदरों में एक बंदर ऐसा भी था जिसकी सारी आदतें मनुष्य से मिलती जुलती थीं । अंतर केवल इतना ही था कि वह बंदर इन्सान की तरह बोल नहीं सकता था । हर समय वह राजा के साथ ही रहता । सब लोग उसे राजा का लाडला बंदर कहते थे ।

    एक बार दोपहर के समय राजा बड़े आनन्द से लेटा हुआ था । राजा का लाडला बंदर गर्मी से राजा को बचाने के लिए पंखे से हवा कर रहा था । पंखे की ठंडी हवा से राजा को बहुत आनन्द आ रहा था । इसी बीच कुछ मक्खियां अंदर आईं । इनमें से दो मक्खियां बार - बार राजा के मुंह पर आकर बैठ जाती थीं ।बंदर उन्हें हर बार उड़ा देता । मगर यह मक्खियां कुछ अधिक ही ढीठ थीं जो बंदर के बार - बार उड़ाने पर भी राजा के मुंह पर आकर बैठ जाती थीं । 

   बंदर कितनी देर तक उन्हें उड़ाता रहा । मगर मक्खियों ने भी अपनी जिद न छोड़ी ।

  बंदर को दिल - ही - दिल में मक्खियों पर बहुत क्रोध आ रहा था । वह बार बार उन्हें उड़ाता और सोचता रहा कि इनका क्या करूं ? 

   राजा बड़े आनन्द से सो रहा था । यदि इन मक्खियों ने अपनी जिद न छोड़ी राजा की नींद ख़राब हो गई तो उसका अंत दूर नहीं । यह मक्खियां उसकी मौत का कारण बन सकती हैं । फिर वह इन मक्खियों को ही क्यों न मार डाले । यही सोच रहा था बंदर कि मक्खियां फिर राजा के मुंह पर आ बैठीं । अबकी बार बंदर बहुत क्रुद्ध हुआ । उसने झट से राजा के पास ही लटकती तलवार को म्यान से निकाला और उन मक्खियों पर वार कर दिया । 

  मक्खियों का तो कुछ भी न बिगड़ा और वे बड़ी होशियारी से उड़ गईं । मगर राजा का मुंह कट कर उसके सिर से अलग हो गया । मूर्ख दोस्त ने अपने पागलपन से राजा को ही मार डाला ।

 शिक्षा : नादान दोस्त से अक्लमन्द दुश्मन अच्छा होता है । 

 धन्यवाद

जय हिन्द  जय भारत। 

 

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