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वैद्य की आवश्यकता।

     


 
    महात्मा ईसा  अपनी दयालुता के कारण सदा दुखी और पापी कहे जाने वाले अपराधियों से हर समय घिरे  रहते थे।  यहां तक कि जब वे भोजन किया करते थे ,तब भी बहुत से पतित  लोग उन्हें घेरे रहते थे।  एक बार वह बहुत से नीच जाति के और पापी पतितो के साथ बैठे भोजन कर रहे थे।  यहां देख कर एक विरोधी ने उनके शिष्य से कहा - ''तेरे गुरु जिसे तुम लोग भगवान का बेटा और पवित्र आत्मा बतलाते हो, इस प्रकार नीच और पतितो से प्रेम करता है, उनके साथ बैठा भोजन पा रहा है। फिर भला  तुम लोग किस प्रकार आशा कर सकते हो कि हम लोग उसका आदर करें और उसकी बात माने। 



           'महात्मा ईशा  की बात सुन ली और विनम्रतापूर्वक उत्तर दिया -भाई  वेद की आवश्यकता रोगियों को होती है।  निरोगो  को नहीं।  धर्म की आवश्यकता पापियों को होती है उनको नहीं जो पहले से ही अपने को धार्मिक समझते हैं।  मैं धर्मआत्माओं का नहीं पापियों का हित करना चाहता हूं उन्हें मेरी बहुत जरूरत है। ''

           सिख -इस लेख से हमें यंहा सिख लेनी चाहिये की सामने वाला कितना ही बुरा करे हमें अपनी अच्छाइया नहीं छोड़नी चाइये। 


धन्यवाद ❤❤❤

जय हिन्द  जय भारत 

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