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Artical: विधार्थियों के लिए वास्तुशास्त्र नियम।

 




    • अध्ययन कक्ष या स्टडी रूम एक ऐसी । जगह हो , जहाँ पर शांति , एकाग्रता हो । घर का ऐसा हिस्सा जहाँ शोर न हो , ताकि बच्चे या बड़े का ध्यान न बँटे । एकाग्रतापूर्ण माहौल ही अध्ययनकक्ष की शोभा को बढ़ाता है। 

    अध्ययन कक्ष में टेबल या मेज सदा पूर्व दिशा की तरफ रखें । इससे बच्चे का मन पढ़ाई में लगेगा तथा एकाग्रता में वृद्धि होगी । पूर्व दिशा की ओर मुँह करके पढ़ना स्वास्थ्य के लिए हितकर होता है और वैज्ञानिक नजरिए से भी सही होता है । 

अध्ययन कक्ष में हल्के पेस्टल , आसमानी रंग के परदे और दीवारों पर भी हल्का पेंट प्रयोग करना चाहिए । स्टडी रूम में अधिक साज - सज्जा से परहेज करना चाहिए । पढ़ाई से संबंधित टेबल , कुर्सी , रैक , अलमारी आदि को करीने से सजा कर रखना चाहिए । आपका स्टडी रूम बड़ा हो तो लाइब्रेरी भी वहीं पर बना सकते हैं । स्टडीरूम बड़ा होने पर ही कम्प्यूटर की व्यवस्था करना उचित रहता है ।

 रोशनी वाले , साफ व हवादार कमरे में अध्ययन करने पर शारीरिक ऊर्जा संतुलित रहती है । फिर भी , यदि आपके घर में कोई ऐसा कमरा नहीं है जो पूर्व दिशा में हो तो अन्य स्थान पर प्रकाश और वायु की व्यवस्था की जा सकती है । अगर विद्यार्थी पढ़ाई करते समय पूर्व , उत्तर या पूर्वोत्तर में मुख रख सकें तो सबसे अच्छा है । 

 बच्चों को किसी भारी - भरकम या लम्बी - चौड़ी पूजा - अर्चना आदि के विस्तृत विधि - विधानों में न डालें । केवल अध्ययन कक्ष में या अध्ययन टेबल के सामने या आसपास कोई सही स्थान देखकर एक छोटी - सी माँ सरस्वती की फोटो या मूर्ति या अपने धर्म के अनुसार किसी धार्मिक चित्र का प्रयोग कर मन की शुद्धि और अच्छे विचारों के निर्माण में मदद करेगी । सकते हैं । यह प्रवृत्ति बच्चों में सामाजिक मनोवैज्ञानिक एवं धार्मिक रूप में मन की शुद्धि और अच्छे विचारों के निर्माण में मदद करेगी । 

अगर विद्यार्थी इन बातो का अनुशरण करे तो वह पड़े में मन अच्छे  लगा सकेगा। 

धन्यवाद ❤ 

जय हिन्द  जय भारत। 

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